यह खेल का महिमामंडन करने या उसकी कूटनीतिक क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आह्वान नहीं है। न ही क्रिकेट ने कभी दक्षिण एशिया के संघर्षों का समाधान किया है। लेकिन उसने उनके तीखेपन को कुछ हद तक कम ज़रूर किया। उसने लोगों को यह याद दिलाया कि सीमाओं और विवादों के बावजूद एक साझा सांस्कृतिक भाषा भी मौजूद है। अब उस भाषा का क्षरण पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। क्योंकि जब सांस्कृतिक आदान-प्रदान के सबसे सरल रूप भी कठिन हो जाते हैं, तो भरोसे का पुनर्निर्माण अनंत रूप से अधिक कठिन हो जाता है।
