अनिल के. राजवंशी

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नवाचार का रोमांच: ग्रामीण भारत में एक सार्थक जीवन कैसे जिएँ

यह हम सभी के लिए शर्म की बात है कि आज़ादी के 78 साल बाद भी हमारे ग्रामीण जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी आदिम और बेहद पिछड़ी परिस्थितियों में जीवन जी रहा है। उनके पास बिजली, स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन, पीने का साफ पानी और घरों में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं। किसी तरह आधुनिक तकनीक उनके जीवन तक पहुँच ही नहीं पाई है।